सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गन का लाइसेंस लेने का क्या प्रोसेस है ?

 गन का लाइसेंस लेने का क्या प्रोसेस है ?


    आत्म रक्षा या खुद के परिवार और अपनी संपति की सुरक्षा का अधिकार सभी को है, आत्म रक्षा के लिए कानून भी व्यक्ति को हत्या तक के मामले में राहत देता है... व्यक्ति को अपनी संपत्ति अपने परिवार और स्वयं की सुरक्षा पर खतरा महसूस होता है, तब उसकी रक्षा प्रशासन या समाज करता है... लेकिन हर समय प्रशासन और समाज साथ नहीं रहते, उसके लिए व्यक्ति को खुद ही अपनी सुरक्षा करनी होती है... स्वयं, परिवार और संपति की सुरक्षा के लिए किसी हथियार की जरूरत होती है, लेकिन कोई भी धारदार हथियार या गन या किसी भी प्रकार का खतरनाक हथियार रखना कानून की नजर में जुर्म होता है... धारदार हथियार के अलावा प्रशासन गन रखने की अनुमति देता है, लेकिन उसके लिए हमें एक मजबूत कारण बताना पड़ता है... प्रशासन को बताना पड़ता है कि... हथियार की जरूरत क्यों है...? 
तो आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि गन का लाइसेंस किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है...?  गन का लाइसेंस लेना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है...
    
    जरूरी दस्तावेज
  1. पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी, लाइसेंस)
  2. एड्रेस प्रूफ
  3. खुद का फिटनेस सर्टिफिकेट
  4. इनकम सर्टिफिकेट
  5. नया फोटोग्राफ (खुद का)
आर्म्स लाइसेंस या गन के लाइसेंस के लिए सबसे पहले इस वेबसाइट पर जाना होगा... 


यहां अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करके अपनी कैटेगरी चुननी होगी... फिर अपना स्टेट, आदि जरूरी कॉलम भरने होंगे... फिर New Arm Livence पर क्लिक करके फार्म A1 चुनना है, इसके बाद अपनी पूरी डिटेल भरकर, आगे अपनी अतिरिक्त डिटेल देनी है... जैसे आपके ऊपर कोई मुकदमा है, अगर है तो किस कैटेगरी का मुकदमा है... आपको आर्म्स यानी गन का लाइसेंस क्यों चाहिए...? इसमें आप अपनी फसल की जानवरों से सुरक्षा या अपने प्रोटेक्शन के लिए या किसी भी उचित कारण को चुन सकते हैं....! अगर आप अपनी फसल की सुरक्षा के लिए लाइसेंस लेना चाहते हैं तो अपनी जमीन की डिटेल, किन- किन जानवरों से सुरक्षा करनी है, जैसे नील गाय, सुअर आदि... आप हिरण, मोर या विलुप्तप्राय जीव जंतुओं के लिए लाइसेंस नहीं ले सकते,  जो संरक्षित प्रजातियां हैं, उनसे सुरक्षा के लिए लाइसेंस नहीं मिलता...!
         इसके बाद आप अपने लाइसेंस की कैटेगरी चुनेंगे... जिसमें पिस्टल, राइफल वगेरह आती हैं... फिर जिस भी हथियार के लिए लाइसेंस चाहिए उसका पूरा विवरण देना होता है... आगे आपको कहां के लिए लाइसेंस चाहिए... जिला, राज्य आदि... इसके बाद इस फॉर्म को सबमिट करना है... सबमिट करने के बाद एक रिफ्रेंस नंबर मिलेगा, जिसको नोट कर लेना चाहिए... फिर Next पर जाना होगा... इसके बाद अपना एक फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करना होता है... इसके बाद इस फॉर्म को डाउनलोड करके प्रिंट निकाल कर इसके साथ अपने सारे दस्तावेज संलग्न करके फार्म पर दी हुई अथॉरिटी के ऑफिस में जमा करवा देना होता है... इसके बाद अथॉरिटी को आपका लाइसेंस लेने का उद्देश्य उचित लगता है, तो जल्दी ही अप्रूवल मिल जायेगा...! 

      आर्म्स लाइसेंस का मिलना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं...! आपके पास कोई बिना लाइसेंस का हथियार पकड़ा जाता है तो 7 से लेकर 14 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है...!  उचित कारण है तो आपको लाइसेंस मिल सकता है...!



ये थी जानकारी आर्म्स लाइसेंस पर... आप इस मामले में क्या सोचते हैं... कमेंट करके बता सकते हैं...!

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पॉवर ऑफ अटॉर्नी

 पॉवर ऑफ अटॉर्नी       कई बार हमें कुछ कामों की जरूरत पड़ती है और हम उन्हें कर पाने में सक्षम नहीं होते या अपना काम छोड़कर वह काम करना नहीं चाहते... या हम बीमार होते हैं और हमारे काम रुक जाते हैं तो... ऐसी स्थिति में हम अपने आप को असहाय महसूस करते हैं... ऐसा ही मामलों में काम आती है पावर ऑफ अटॉर्नी...  पावर ऑफ अटॉर्नी होती क्या है...? पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट 1882 के अनुसार एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपना लीगल प्रतिनिधि नियुक्त करता है...!  जो घोषित करता है वो प्रिंसिपल कहलाता है और जो जिसको घोषित किया जाता है उसे एजेंट कहा जाता है...! एजेंट प्रिंसिपल के स्थान पर ज्यूडिशियल, फाइनेंशियल और अन्य फैसले ले सकता है... प्रिंसिपल के स्थान पर कोई डीड आदि साइन कर सकता है... ये सब कानूनन वैध होते हैं...! एजेंट पावर ऑफ अटॉर्नी के दायरे से बाहर नहीं जा सकता, यानी किसी मामले में मनमानी नहीं कर सकता... अगर एजेंट की वजह से प्रिंसिपल को कोई नुकसान हो जाता है तो उसकी भरपाई एजेंट ही करेगा, ये भी प्रावधान है...!  पावर ऑफ अटॉर्नी कैसे...

दीवानी मुकदमा या सिविल केस कैसे किया जाता है...?

दीवानी मुकदमा या सिविल केस कैसे किया जाता है...?        काम करने के अपने अपने तरीके होते हैं, किसी भी काम को अगर ठीक तरीके से किया जाए तो, उस काम के सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती है, अगर ठीक प्रोसीजर से कोई काम किया जाए तो आधी समस्याएं तो वैसे ही सुलझ जातीं है...! कोर्ट के मामलों में काम अपनी एक प्रक्रिया से होता है... प्रक्रिया पर ही निर्भर है कि बात किस स्तर तक जा सकती है, प्रक्रिया अगर ठीक है तो आप बिना समस्याओं का सामना किए... अपनी मंजिल पा सकते हैं...!  आज हम सिविल केस यानी दीवानी मुकदमा दायर कैसे किया जाए, उसके विषय में जानेंगे...! Civil Case या दीवानी मुकदमा   ऐसी स्थिति में किया जाता है, जब हमारा उद्देश्य अपना अधिकार प्राप्त करने का हो, ऐसे मामलों में जेल नहीं होती... इनमें तलाकशुदा महिला को अपना गुजारा भत्ता प्राप्त करना हो, किसी पर मानहानि का मुकदमा करके हर्जाना लेना हो... आदि मामले आते हैं, इनका उद्देश्य जेल भिजवाना नहीं होता...  Civil Case या दीवानी मामलों में सबसे महत्वपूर्ण है, कोर्ट का प्रोसीजर फॉलो करना... प्रोसीजर का पाल...

उम्र कैद की सजा वास्तव में कितने साल की होती है...?

उम्र कैद की सजा वास्तव में कितने साल की होती है...?    जब कोई भ्रांति फैल जाती है तो वो बड़े व्यापक स्तर पर फैलती है... उसका जनमानस पर बहुत गहरा असर पड़ता है... गलत और तथ्यहीन बात बहुत जल्द फैल जाती है, ऐसे बातें लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है... फिर चाहे लाख कोशिश क्यों ना कर लीजिए... लोग गलत को ही सच मानेंगे...! ऐसी ही भ्रांति भारत में उम्रकैद की सजा को लेकर फैली हुई है... आम धारणा है कि उम्रकैद की सजा 14 साल ही होती है... जबकि ऐसा नहीं है..! मारू राम वर्सेज भारत सरकार के केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के वकीलों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उम्रकैद का मतलब मुजरिम को पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी पड़ेगी... संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि उम्रकैद की सजा 14 साल है... उम्रकैद का मतलब जीवन भर जेल में ही रहना होगा... मारूराम और उसके साथी 1981 से हत्या के मामले में जेल में बंद हैं, और उनके वकीलों ने उनकी जेल में बिताई गई 14 वर्ष की अवधि के बाद उनको रिहा करने के लिए एक याचिका दायर की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया...! IPC के सेक्शन 45 में ये उल्लेख किया ...